एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Tuesday, February 10, 2009

निशाने पर निगहबान


तमाम कोशिशों के बावजूद वन्यजीवों की तस्करी अब भी जारी है। सरिस्का ही नहीं, तालछापर, सवाईमाधोपुर, जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और झालावाड़ सहित प्रदेश के कई छोटे-बड़े इलाकों से वन्यजीव संरक्षण कानून को ताक में रख कर तस्कर खुलेआम करोड़ों की दलाली खा रहे हैं। प्रदेशभर में फैले वन्यजीव तस्करी के जाल से परदा उठाती रिपोर्ट।

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जेब पर भारी बिजली


अंदरूनी खामियों के कारण राजस्थान की बिजली कंपनियां आज गहरे संकट से गुजर रही हैं और इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ रहा है। बिजली की दरें बढ़ रही हैं और घाटा भी। आखिर क्यों बढ़ रहा है आम उपभोक्ता पर भार और कहां खाक हो जाती है करोड़ों की बिजली? इस सारे मामले से परदा उठाती विशेष रिपोर्ट।

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हीरे की हेराफेरी

हीरा नकली है या असली? वह कहां से आया है और कहां जाने वाला है, बाजार में कोई नहीं जानता। हीरों की तस्करी में सरकारी मिलीभगत से इसकी चमक फीकी पड़ रही है। हीरा तस्करी के फैलते नेटवर्क की पड़ताल करती विशेष रिपोर्ट।

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दवा के नाम पर


राज्य में पुरुषत्व जगाने के नाम पर लोगों की शारीरिक शक्ति से खिलवाड़ करने वाली क्वैक फार्मेसियों का जाल फैल चुका है। सरकारी स्वास्थ्य महकमा चैन की नींद सोया है और हजारों युवक प्रतिदिन इन फर्जी चिकित्सकों के चंगुल में फंस रहे हैं। खोजपूर्ण रिपोर्ट।
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...भई! सब गोलमाल


इंटरनेट के जरिए रातों-रात अमीर बनने की चाहत और करोड़ों का दांव खेलने का शौक लोगों को जुए की लत का शिकार बना रहा है। शौक पूरा करने के चक्कर में वे अपनी जेबें खाली करवा रहे हैं। देशभर में तेजी से फैलते जुए के इस जाल से परदा उठाती विशेष रिपोर्ट।

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सोने में सेंधमारी

सोने में मिलावट के बढ़ते मामलों ने स्वर्ण विक्रेताओं पर ग्राहक के भरोसे को शक के दायरे में ला दिया है। सरकारी तंत्र के प्रयास भी इसकी रोकथाम में नाकाम हो रहे हैं। बड़े पैमाने पर हो रही इस जालसाजी का नेटवर्क पूरी दुनिया में फैला है। मिलावट के इस गोरखधंधे पर नजर डालती रिपोर्ट।
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Thursday, February 5, 2009

20 रुपए में मौत सत्यापित !

20 रुपए जेब में हों, तो जपयुर के अधिवक्ता नोटेरी आपको यमदूत से मिला सकते है। शहर के नोटरी किसी की भी मौत का सत्यापन महज 20 रुपए में कर देते हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण, कलेक्ट्री, मिनी सेकेटे्रट परिसर और उच्च न्यायालय परिसर में बैठे नोटेरी अधिवक्ताओं द्वारा बिना देखे, बिना संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी के फर्जी तौर पर ऐसे शपथ-पत्र जारी करने का गोरखधंधा तेजी पकड़ रहा है।

गत वर्ष 8 जनवरी को अपनी ही मौत का शपथ-पत्र मैने जयपुर विकास प्राधिकरण के एक नोटेरी से सत्यापित करवा डाला। इस मौत को सत्यापित करने वाले नोटेरी अधिवक्ता ने 20 रुपए लिए और चंद सैकंड में इस काम को अंजाम दे दिया। जयपुर विकास प्राधिकरण परिसर में सत्यापित हुए इस शपथ-पत्र में मैंने इसी दिन अपना आकस्मिक देहांत, इसी परिसर में होना बताया। दस रुपए के स्टाम्प (07एए 849806) पर मैंने अपनी मृत्यु सुनिश्चित की, जिसे सत्यापित करने वाले नोटेरी ने आवेदक का सत्यापन के दौरान वहां उपस्थित होना भी स्वीकार किया। दिलचस्प बात यह है कि अगर आवेदक की मृत्यु हो चुकी है, तो वह इसे सुनिश्चित कैसे कर सकता है? इस सवाल पर गौर फरमाने का कष्ट भी संबंधित नोटेरी पब्लिक ने नहीं किया। संवाददाता ने इस शपथ पत्र में स्वर्ग में विराजमान होकर जयपुर की रक्षा करने का जिम्मा लिया। अपनी ही मौत को शुभ कार्य बताया। ईश्वर से अपनी आत्मा को शांति प्रदान करने का निवेदन किया और अपनी मृत्यु रद्द करने के सभी अधिकार यमदूत तथा यमराज का सौंपे, जिसे नोटेरी पब्लिक ने बिना देखे, बिना पढ़े सत्यापित कर डाला। नोटेरी द्वारा रजिस्टर रखे जाने और उनके द्वारा चार्ज की गई फीस की रसीद जारी करने का प्रावधान होने के बावजूद शहरभर के नोटेरी पब्लिकों द्वारा आवेदकों को रसीद जारी नहीं की जा रही है। महज 20 रुपए और चंद सैकंड के इस खेल ने शहरभर के नोटेरी पब्लिकों द्वारा चलाए जा रहे इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया।

...और यह करतूत अब भी जारी है।

नोटेरियल कार्यों का क्या है प्रावधान
नोटेरी अधिनियम 1952 की धारा 8 के मुताबिक
* किसी लिखित के निष्पादन को सत्यापित, पुष्ट, प्रमाणित या अनुप्रमाणित करना।
* किसी व्यक्ति की शपथ प्रशासित करना या उससे शपथ-पत्र लेना।
* उत्तम प्रतिभूति की स्वीकृति या भुगतान या मांग के लिए किसी वचन-पत्र, हुंडी या विनिमय-पत्र को प्रस्तुत करना।

 
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