एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Tuesday, February 10, 2009

निशाने पर निगहबान


तमाम कोशिशों के बावजूद वन्यजीवों की तस्करी अब भी जारी है। सरिस्का ही नहीं, तालछापर, सवाईमाधोपुर, जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और झालावाड़ सहित प्रदेश के कई छोटे-बड़े इलाकों से वन्यजीव संरक्षण कानून को ताक में रख कर तस्कर खुलेआम करोड़ों की दलाली खा रहे हैं। प्रदेशभर में फैले वन्यजीव तस्करी के जाल से परदा उठाती रिपोर्ट।

(इस खबर को पूरा पढऩे के लिए इमेज पर क्लिक करें)

2 comments:

विनय said...

बहुत ख़ूब, सुन्दर प्रस्तुति


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गुलाबी कोंपलें | चाँद, बादल और शाम

दर्पण साह 'दर्शन' said...

insaan aur jungle ki ladai main jeet "Janwar" ki hogi.....

Ya jiski jeet hogi wahi jaanvar hoga....

 
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