एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Friday, July 24, 2009

युवा सीईओ आनंद को सीधी टिप्पणी दें



बी4यू इंडिया डॉट कॉम के सीईओ आनंद माहेश्वरी के चर्चे दुनियाभर में हो रहे हैं। आनंद की वेबहोस्टिंग साइट से जुड़े और उनके संपर्क में आए लोग आनंद के ब्लॉग पर लगातार टिप्पणियां दे रहे हैं।


आनंद को अपनी टिप्पणी सीधे पहुंचाने और उन्हें मिल रहे रेस्पॉन्स को देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें-


http://hosting.b4uindia.com/blog/web-hosting/anand-maheshwari-on-rajasthan-patrikas-ravivariya-news-paper/-patrikas-ravivariya-news-paper/

उपरोक्त स्टोरी 'मेरा देश मेरा गांव' में देशभर के ऐसे युवाओं को ही शामिल किया गया है, जिन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हुए अपने-अपने क्षेत्र में ऐसा काम किया है जो मिसाल देने योग्य है। प्रकाशन के बाद इस स्टोरी का देशभर से बड़े पैमाने पर रेस्पॉन्स मिला है।

आनंद का कवरेज राजस्थान पत्रिका के संपूर्ण भारत संस्करण में प्रसारित रविवारीय परिशिष्ट में हुआ है। पूरी कवरेज को विस्तार से पढऩे के लिए इस तस्वीर पर क्लिक करें।
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Wednesday, July 22, 2009

तकनीक का तेज खिलाड़ी


एलेक्सा रैंकिंग देखेंगे, तो आप चौंक जाएंगे। ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले जयपुर के युवा सीईओ आनंद माहेश्वरी (26) की वेब होस्टिंग और डेवल्पमेंट साइट बी4यू इंडिया डॉट कॉम (http://www.b4uindia.com/) तेजी से चर्चित हो रही है।


विश्व की 10 करोड़, 98 लाख वेबसाइटों में बी4यू इंडिया डॉट कॉम 45,348 के पायदान पर है। अपनी शुरूआत के चार साल में इस पायदान पर पहुंचना ही खुद ब खुद बी4यू इंडिया डॉट कॉम की सफलता की कहानी बयान कर देता है। 19 अप्रेल, 2005 को करियर के हर विकल्प के आगे हार मान चुके 22 वर्षीय युवा आनंद माहेश्वरी ने एक डोमेन रजिस्टर करवाया। यही डोमेन आज दक्षिण एशिया सहित, अमरीका और यूरोपीय देशों में खासा चर्चित है। व्यापारी वर्ग के लिए येलो पेजेज, युवाओं के लिए 1500 से ज्यादा फ्री गेम्स, शॉपिंग स्टेशन और न्यूज पोर्टल के रूप में स्थापित यह वेबसाइट वेब होस्टिंग के क्षेत्र में देश में दूसरे नंबर पर आ चुकी है। 6 हजार क्लाइंट्स और सालाना 40 लाख के टर्नओवर के साथ बी4यू इंडिया का सफर जारी है। जुनून से बनी अपनी कंपनी की शुरूआत के बारे में बताते हुए आनंद कहते हैं, 'चार साल पहले मैंने 20 हजार रुपए इकट्ठे किए और एक कंप्यूटर खरीद कर काम शुरू किया। अमरीका और यूरोप से वेबसाइट बनाने का फ्रीलांस काम लेना शुरू किया और पहले महीने मात्र 1500 रुपए का फायदा हुआ। मैं जुटा रहा, क्योंकि मेरे पास वापस लौटने का विकल्प नहीं था।' ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद ई-तकनीक में कम उम्र में ही महारत हासिल करने वाले आनंद के पास अब पांच लोगों का स्टाफ है। हर रोज 16 घंटे से ज्यादा अपने काम को देने वाले आनंद की पढ़ाई गांव के स्कूल में ही हुई। स्नातक के बाद आरएएस व आईएएस की तैयारी में जुट गए। दो सालों तक तैयारी के बावजूद भी जब कहीं सलेक्ट नहीं हुए, तो अपने करियर को नई उड़ान देने की कोशिश में जुट गए। आनंद बताते हैं, 'अनाज के कारोबार वाले आड़तिया परिवार से ताल्लुक होने की वजह से मुझे कोई गाइड करने वाला नहीं था। मैंने कंप्यूटर कोर्स इसलिए किया, क्योंकि उस दौर में सब ऐसा कर रहे थे। परीक्षाएं दीं, लेकिन जब चारों तरफ से फेल हो गया, तो मैंने अपने उस हुनर को टटोला जिसमें मेरी दिलचस्पी थी। कई सालों पहले मैं हर रोज 14-15 घंटे नेट खंगालता रहता। बस मैंने अपनी इसी दिलचस्पी को व्यापार का रूप देने की ठान ली।' आनंद अब ग्लोबल प्लेयर बनने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। आनंद कहते हैं, 'जब मैंने कंपनी के नाम में इंडिया जोड़ा, सबने कहा था सक्सेस नहीं हो पाओगे और क्योंकि कंपनी के नाम के साथ इंडिया जुड़ा हुआ है। आज अपनी कंपनी के नाम में इंडिया होने की वजह से एक बड़ा वर्ग जो भारत से काम चाहता है, हम पर भरोसा जता रहा है।'

आनंद की इस तेजी से चर्चित हो रही वेबसाइट को देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

आनंद का फोन नंबर- 09351159225
(राजस्थान पत्रिका के रविवारीय 19 जुलाई, 2009 में प्रकाशित मेरे आलेख 'मेरा देश मेरा गांव' से...)

Friday, July 17, 2009

स्टाम्प पर फोटोकॉपी का गोरखधंधा उजागर


राजस्थान विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए प्रदेशभर से आ रहे विद्यार्थियों को स्टाम्प वेंडर और दलाल किस तरह चुंगल में फंसा रहे हैं, इसी जालसाजी से 16 जुलाई को परदा उठाया। राजस्थान पत्रिका के जयपुर संस्करण में छपी इस खबर के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

स्टाम्प से जुड़े इस गोरखधंधे के उजागर होते ही कल जयपुर विकास प्राधिकरण सहित शहर के स्टाम्प वेंडरों में हड़कंप मच गया। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के एडीएम ने कार्रवाई करते हुए एक तीन सदयीय सतर्कता दल गठित किया है, जो पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट विभाग को प्रस्तुत करेगा।

इस खबर को विस्तार से पढऩे के लिए कृपया इन इमेजों पर क्लिक करे...

Thursday, July 2, 2009

मंदी दिमाग में है, बाजार में नहीं!


सही मायने में मंदी, मंदी नहीं मौका है। मौका ज्यादा कमाने का, ज्यादा बनाने का, ज्यादा सहेजने और जुटाने के प्रयास का। ना मानो तो इन पर जरा विचार कर लो...

- प्रॉपर्टी मार्केट ठप्प बताया जा रहा है, लेकिन रीयल बायर्स बेझिझक निवेश कर रहे हैं। अगर आप प्रॉपर्टी के ऐसे पुख्ता खरीदारों की संख्या जुटाएं, तो आज भी आंकड़ा काफी ऊपर है। जो प्रॉपर्टी डीलर मान रहे हैं कि मंदी नहीं है खरीदार तो अब भी मिल रहे हैं, वह जमकर कमा भी रहे हैं।

- सुना है कंपनियां छंटनी कर रही हैं। वह भी छंटनी नहीं है, अवसर है। कंपनी के नजरिए से देखें, वह अपने बेहतरीन और उच्च क्षमता वाले लोगों के साथ काम करने में हमेशा दिलचस्पी लेती है। जो काम करता है और कर सकता है, उसे कोई दिक्कत नहीं। ...आखिर अच्छे लोग कंपनी में होंगे, तो कंपनी को ही फायदा होगा न।

- जितनी कारें, इस कथित मंदी के माहौल में बिकी हैं, पिछले किसी सीजन में नहीं बिकी। किसी कार शोरूम के डीलर से अकेले में बात कीजिए या फिर आंकड़े तलाशिए आप खुद जान जाएंगे।

- 1929 में जब मंदी आई थी, तो नेटवर्क मार्केटिंग का उदय हुआ था। बहुत गहरा विषय है यह। इसने उस मंदी में लोगों कि जितनी मदद की, मिसाल देने जैसा है। आज भी नजर दौड़ाएं, गौर से देखें, नेटवर्क मार्केटर्स बढ़ रहे हैं। कंपनियां बढ़ रही हैं। नेटवर्किंग के बाजार का औसत अनुपात बढ़ ही रहा है। घट नहीं रहा।

- आप और हम नौकरी करते हैं, कम समझ में आएगा। लेकिन एक एंटरप्रेन्योर से पूछिए इस माहौल में कम लागत पर कंपनियां स्थापित करने के ढेरों अवसर मौजूद हैं, बस आपके आइडिए में दम हो।

- अखबारों के क्लासिफाइड्स में लुभावने, दोस्ती बनाने, ज्यादा कमाने जैसे पैसा उलझाने वाले विज्ञापन तेजी से बढ़ रहे हैं। जब लोग पैसा डालेंगे ही नहीं, तो ऐसे विज्ञापन बढ़ेगे ही कैसे?

यह सब मौके हैं, मौका कंपनी के पास, कार या प्रॉपर्टी बेचने वाले के पास, नेटवर्किंग करने वाले के पास, एंटरप्रेन्योर और ढेर सारे ऐसे ही लोगों के पास। दिमाग दौड़ाइए, मंदी को भगाइए। जितनी जल्दी इसे दिल-दिमाग से निकाल देंगे, कम से काम आपकी मंदी जरूर दूर हो जाएगी।

 
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