एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Friday, August 21, 2009

जर्सी नंबर 99!


बॉबी मार्टिन बिना पैरों वाले विश्व के इकलौते फुटबॉल खिलाड़ी हैं। ओहियो के एक साधारण परिवार में जन्में बॉबी का कद सिर्फ तीन फुट और एक इंच है। इनका वजन भी मात्र 117 पॉन्ड ही है। फुटबॉल के इतिहास में अपनी तरह के इस अनोखे खिलाड़ी की कहानी, इसी की जुबानी -

जर्सी नंबर 99! मुझे इसी नाम से जाना जाता है। मैं बिना पैरों वाला विश्व का एकमात्र फास्ट फॉरवर्ड फुटबॉलर हंू। पैरों के बिना संतुलन नहीं बन पाने के कारण मुझे अपने हाथों से पेंडुलम की तरह शरीर का बैलेंस बनाना होता है, लेकिन जब मैदान पर होता हंू, तो दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में एक आवाज में हूटिंग होती है ...और उस आवाज में बस मेरा ही नाम होता है। 3 नवंबर, 1987 को मेरा जन्म ओहियो के एक बिलकुल साधारण परिवार में हुआ, जहां सुविधाओं के नाम पर मेरे हिस्से केवल हौसला आया।

मैं सिर्फ तीन फुट का हंू और मेरा वजन मात्र 117 पॉन्ड है, लेकिन मेरे हॉसलों ने मुझे कभी कद में छोटा और अपाहिज नहीं समझने दिया। मेरी जिंदगी में कई मुश्किल दौर आए। मेरे ना चाहते हुए भी मुझे आस-पास के लोगों ने यह जताने की बार-बार कोशिश की कि मैं अपाहिज हूं। मेरा भाई फुटबॉल खेला करता था। उसी को देखकर मैंने इसे खेलना शुरू किया। जिन खिलाडिय़ों के दोनों पांव सलामत थे, मैं उनसे भी कहीं अच्छा फुटबॉल खेलता था। लेकिन मुझे मैदान में उतरने से रोक दिया जाता। एक बार मुझे रोकने के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ हाईस्कूल एसोसिएशन ने अपनी नियमावली का हवाला दे दिया। वे चाहते थे कि फुटबॉल के मैदान में उतरने वाला खिलाड़ी पैरों में जूते, घुटने पर पैड जरूर बांधे। ...लेकिन मैं जूते और पैड कैसे बांधूं? मेरे तो पांव ही नहीं हैं और ना ही घुटने? पैर ना होने की वजह से मैंने जूतों को अपनी गर्दन पर बांध कर खेलना शुरू कर दिया। आखिर उन्होंने मेरे खेल के आगे हार मान ली।

आज जब मैं स्टेडियम में खेलने उतरता हंू, तो मेरा परिचय 'द 2005 होमकमिंग किंग' कहकर करवाया जाता है। मैदान पर 5 से 15 गज की दूरी तक पूरी तरह मुस्तैद रहने के कारण कोच अर्ल व्हाइट मेरे खेल से बेहद खुश हैं। वे मुझे अपनी टीम में जान फूंकने वाला खिलाड़ी और मैदान पर छह फीट, छह इंच के किसी भी तेज खिलाड़ी से ज्यादा काबिल मानते हैं। मुझे याद है जब एक मैच के बाद मेरी प्रतिद्वंद्वी टीम ने मुझे सुपरमैन कहा था। उस दिन जब मैं मैदान से बाहर आया, 200 से ज्यादा लोग मेरा ऑटोग्राफ लेने और साथ फोटो खिंचवाने के इंतजार में खड़े थे।

5 comments:

सैयद | Syed said...

इनके जज्बे और हौसले को सलाम...

...

अनूप शुक्ल said...

गजब!

AlbelaKhatri.com said...

gazab !

anuradha srivastav said...

प्रेरणादायी शख्सियत.......... जिनके हौसले बुलन्द होतो कुछ भी नामुमकिन नहीं बॉबी मार्टिन के बारे में पढ कर तो यही लगता है।

राजीव तनेजा said...

बाप रे!...क्या गज़ब का हौंसला पाया है इस बन्दे ने...

 
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