एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Thursday, October 29, 2009

तूफानों की कमी नहीं जीवन में...


बिना पैरों वाले फोटोग्राफर केविन कोनोली ने खींची विश्वभर में घूम-घूम कर 32 हजार से ज्यादा तस्वीरें। ...आप भी जाने इस तूफानों से भरे जीवन को केविन की ही जुबानी।


मैं 22 साल का हूँ। मेरे दोनों पांव नहीं हैं। बस दो हाथ ही मेरी जिंदगी का सहारा हैं। इन्हीं हाथों के सहारे स्केट बोर्ड पर मुझे अपना सारा सफर तय करना होता है। मैं दो बार पूरी दुनिया घूम चुका हूँ। सफर पूरा होने से पहले मैं अगले सफर की प्लानिंग शुरू कर देता हूँ। मैं व्यावसायिक फोटोग्राफर हूँ और अब तक विश्व भर से 32,728 से ज्यादा तस्वीरें खींच चुका हूँ।


अमरीका के हैलिना में मैंने जन्म लिया था। मेरे पैदा होते ही मां और पिताजी को डॉक्टर का जवाब मिला, 'इसे स्पॉरेडिक बर्थ डिफेक्ट' है। बचपन से ही दोनों पांव नहीं हैं। अपने निचले धड़ को घसीट कर चलना और दोनों हाथों को अपने चलने का साधन बना लेने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। सात साल की उम्र में घरवालों ने मुझे चमड़े की पैंट तैयार करवा कर दी। अक्सर जमीन की रगड़ से शरीर छिल जाता था। इसी रगड़ से मैं बचा रहूँ, मैंने इस पैंट को पहना जो आज तक मेरे साथ है। यह चमड़े और रबर से बनी है, ताकि मुझे चलने में असुविधा न रहे। मुझे हर रोज मां व्हील चेयर पर बिठाकर स्कूल छोडऩे जाती और वापस लाती। इसी समय अपने शरीर का संतुलन बनाना सीखने के लिए मैंने जिम्नास्टिक की क्लास में जाना शुरू कर दिया था। जब मैं 18 साल का हुआ, तो मुझे स्केट बोर्ड दिलाया गया। ...और जैसे मेरे शरीर के पंख ही लग गए। कॉलेज में क्लास लेने के बाद मैं अपना ज्यादा से ज्यादा समय स्केट बोर्ड पर कॉलेज कैंपस में इधर-उधर घूमने में बिताता था। हमेशा महसूस करता कि मैं साधारण व्यक्ति से भी तेज दौडऩे में सक्षम हूँ।


मुझे कभी नहीं लगा कि हार मानने का वक्त आ गया है। मैंने स्केट बोर्ड इतना अच्छे तरीके से सीखा कि एक्स गेम्स में मुझे स्केटिंग के लिए सिल्वर मैडल मिला। जब मैंने एक्स गेम्स में सिल्वर मैडल जीता, तो मुझे इनाम के तौर पर 11 सप्ताह यूरोप और एशिया घूमने का मौका दिया गया। मेरी फोटोग्राफी को 'द रॉलिंग एग्जीबिशन' नाम से प्रस्तुत करना चाहते थे। अपने बड़े कलेक्शन को मैंने निकोन के उस कैमरे से तैयार किया है, जो अक्सर मेरी पीठ पर ही टंगा रहता है। मैंने मजदूरों, बच्चों, भिखारियों, फसलों पर अपनी फोटोग्राफी को केंद्रित रखा है। फोटोग्राफी की शुरुआत मैंने वियना से की थी और मेरी पहली ही फोटोग्राफी सिरीज को जमकर सराहना मिली। मुझे याद है, जब मैं मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी में फोटोग्राफी की पढ़ाई करने गया, तो अपनी पहली क्लास में एक रील भी पूरी नहीं कर पाया था। यहीं पर मैंने फिल्म संबंधी क्लास भी ली थी, जिसमें मैंने असल फोटोग्राफी के मायने सीखे। मेरी फोटोग्राफी को हर जगह सराहना मिली। इसी वजह से मुझे मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी की ओर से फोटोग्राफी ग्रांट (फोटोग्राफी सीखने के लिए सहायता) दी गई, जिसके तहत मैं फोटोग्राफी करने के लिए स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड और फिर आइसलैंड गया। मैं पढ़ाई के लिए न्यूजीलैंड भी गया और अपनी डिग्री वहीं से पूरी की।


मैं थिएटर आर्टिस्ट भी हूँ और अखबारों के लिए लिखना मेरा शौक है। अब तक स्केट बोर्ड से खेली जाने वाली कई स्थानीय प्रतियोगिताओं में मैं भाग ले चुका हूँ। मैं हमेशा यही जानना चाहता था कि यह दुनिया कितनी कलात्मक है? जब सफर पर निकला, तो आज तक रुक ही नहीं पाया। सब मुझे देखते ही हैरत करते हैं और मेरे दोनों पांव नहीं होने की वजह तलाशने की कोशिश करते हैं। मैंने 15 देशों के 31 शहरों से जब तस्वीरें खींची, जिन्हें देख हर किसी ने सराहा। मैं खुश हूँ, मैंने जितना पाया, उतने की उम्मीद कभी नहीं की थी। अपने दोनों पांव न होने का जरा सा भी मलाल मुझे नहीं है। दुनिया घूमी है इसलिए महसूस करता हूँ कि मेरी जिंदगी खुद एक तस्वीर की तरह है, इसमे जितनी खुशी के भाव होंगे, उतनी ही खूबसूरत तस्वीर बनेगी।

13 comments:

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

प्रवीन जी बहुत बहुत धन्यवाद की आपने ऐसे महान केविन कोनोली से अपने पोस्ट के जरिये परिचय करवाया |

ऐसे लोगों के बारे मैं जान कर इनसे मिलने जी चाहता है |

कौन कहता है आसमा मैं सुराग नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो -- दुष्यंत कुमार

Mohammed Umar Kairanvi said...

जाखड भाई, मैं तो सोच भी नहीं पा रहा कमेंटस में किया लिखूं, इस आदमी की हिम्‍मत की दाद दूं या इस की हिम्‍मत और हौसले से मिली सफलता से खुद शर्मिंदा होउं, खेर बहुत अच्‍छा लगा पढके, आगे अल्‍लाह की मर्जी वह इस लेख से किसी को या मुझे किया सबक हासिल करवाता है, बधाई

शरद कोकास said...

धन्य है ऐसे लोग जिनके कारण यह धरती अभी बची है ।

Ratan Singh Shekhawat said...

सलाम है इसके जज्बे और हिम्मत को | और आभार आपका ऐसे लोगो के बारे में जानकारी देने का |

संगीता पुरी said...

विकलांग होते हुए भी केविन कोनोली ने अपने जीवन में जो कर दिखाया .. वह काबिलेतारीफ है .. एक प्रेरक व्‍यक्तित्‍व से परिचय करवाने के लिए आपका धन्‍यवाद !!

mehek said...

aise jazbe ko naman,sahi mayane mein yahi zindagi jeena hai.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही उर्जावान व्यक्तित्व से मिलवाने का आभार. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

S B Tamare said...

प्रवीन जी,

आपका पिछला और अभी का, दोनों पोस्ट में विशेयक समानता है परन्तु यह भी सच्च है की आपकी प्रत्येक पोस्ट में एक आग होती है जो पढने वाले को बा-शिद्दत जलाती रहती है और वो भी लम्बे अंतराल तक !

पढ़कर हम्मे यह अहसास पैदा होता है की जब सामान्य हालत में होते हुए भी हम हिम्मत छोड़ रहे होते है दुश्वारियों के आगे तो केविन कोनोली किस किस्म मिटटी से बना है जो दुश्वारियों को मुंह लुलुआता नजर आरहा है ये जज्वा तो बड़े बड़े सूरमाओं में देखने में नहीं आया / अपने पोस्ट द्बारा केविन कोनोली जैसे हाहाकारी जज्वे को हमारे अंदर जगाने का आपका प्रयास मुझे बहूत अच्छा लगा /

आगे मै विषयांतर कर रहा हूँ की आपने जो ज्योतिष बाबत मामला ब्लॉगर समाज के बिच उठाया था उसके तहत जो तवज्जो लोगो की ज्योतिष की तरफ गयी उसने [मेरी समझ से और उम्मीद है आप भी हमख्याल होंगे ] ज्योतिषियों में ''डेयरिंग पावर'' में भारी इजाफा किया है यानी मै महशूस करता हूँ की ब्लॉगर ज्योतिषी अब भविष्य वानिया करते हुए दुह्साहस करते हुए ज्यादा खतरा मोल लेने लगे है जब की उनकी ज्योतिष विद्या तब भी वो ही थी जब उन्होंने ब्लॉग्गिंग चालू की थी परन्तु उन्होंने कभी वो विषय अपने लेखो में नहीं शामिल किये जो अब मेरे जैसा नव सिखुआ ब्लॉगर कर रहा है, मै बड़ी दुविधा में पड़ा हूँ और आप से राह सुझाने की पुरजोर मांग करता हूँ आप कृपा कर मेरे ज्योतिषीय ब्लोग्गो को गंभीर निगाह डाले ताकि मेरे द्वारा की जारही भविष्य वाणियों का विषय क्या होता है यह समझ सके और फिर दूसरो से तुलना करे तो आप के पूर्वोक्त लेख की सच्चाई उजागर ज्यादा अच्छी तरह हो पाए गी / शीग्र उत्तर पाने की उम्मीद में -shashibhushantamare

राजीव तनेजा said...

केविन कोनोली की हिम्मत और जज़्बे को सलाम..साथ ही आपका भी हार्दिक धन्यवाद ऐसे व्यक्तित्वों से परिचय कराने के लिए

pankaj vyas said...

jaroor paden
तो फिर कैसे होगी सही व सटिक भविष्यवाणी, हमें बदलनी होगी भूमिका

(नोट- यह आर्टिकल प्रवीण जाखडज़ी और संगीतापुरीजी तो बहाना है मुझे तो कुछ गुजरना है..., का ही भाग है, किन्हीं कारणों से हेडिंग को बदला है। इस आर्टिकल में जानबुझकर प्रवीण जाखड़ जी व संगीतापुरीजी के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन इसे आप प्रवीण जाखडज़ी और संगीतापुरीजी तो बहाना है, मुझे तो कुछ कर गुजरना है... लेखमाला के तारतम्य में ही देखें। बाकी बातों की चर्चा लेखमाला की अगले व अंतिम भाग में करेंगे। फिलहाल तो आप इस आर्टिकल को पढ़ें। लेख बड़ा जरूर है, लेकिन निवेदन यही कि पढ़कर अपना मत जरूर बताएं। धन्यवाद -पंकज व्यास, रतलाम)

S B Tamare said...

पंकज व्यास रतलाम वाले के नाम खुला ख़त !
प्रिय पंकज जी,
बड़ा अफ़सोस रहा की आपका ब्लॉग कैसे मेरी नजरो से अछूता रहा, खैर देर आये दुरूस्त आये/
यद्धपि यह देर बड़ी महँगी पड़ रही है मुझे क्योकि जो प्रश्न प्रवीन जाखड जी ने अपने ब्लॉग से संगीता पूरी के बहाने उठाये थे उसका दूसरा सूत्र तो आपने थामा हुआ था और जो मै पढ़ नहीं पाया , खैर अबतो जो होचुका सो हो चुका जाखड जी के सात यक्ष प्रश्नों का मैंने उत्तर लिख दिया था उम्मीद है आपने पढ़ा होगा/
वर्तमान सन्दर्भ में , मै आपके कई बातो से सहमत हूँ और कई से नहीं मसलन मै समझता हूँ की समय चाहे आज का हो या पुराना ज्योतिषी कोई एक दो ही एसे होते थे जिन्हें राजा का आश्रय प्राप्त होता था बांकियो को तब भी धक्के खाने पड़ते थे जो उच्च कोटि के होते थे वो राजाश्रय पाते थे नाकि सभी / संघर्ष पहले भी था आज भी है और संघर्ष ना हो तो सोने को निखारा नहीं जा सकता / संघर्ष के बिना वास्तविक ज्योतिष बिद्या प्रकट ही नहीं हो सकती अतः जिस किसी संगीता पूरी में दम हो वो प्रवीन जाखड जैसे संदेहों का मुहतोड़ जवाब दे या फिर अपने घर बैठे और गोलगोल जवाब दे कर अपने जैसे गोलगोल ब्लोगरो का जी बहलाए / यदि कोई ज्योतिषी लोगो को बेवकूफ बना रहा है तो इसमे ज्योतिषी का कसूर कम और लोगो का कसूर ज्यादा है क्यों कोई आदमी बेकार वस्तु खरीद कर अपने घर लेजाता है क्या प्रभु ने नेत्रा नहीं दिए है जो वस्तु को परख कर खरीद नहीं सकते / मुझे पढ़े लिखे भतेरे डॉक्टर मिले जो आधुनिक अंग्रेजी भाषा बोल कर लोगो से दैत्यों की तरह धन लूट लेते है मै खुद जीवन में चार बार उनका शिकार बन चुका हूँ तो उन पढ़े लिखे आधुनिक विज्ञानिक दृष्टि कोण वालो को कोई कुछ नहीं कहता, हाँ! यह जरूर बाते होती है पीठ पीछे की वो फलना डॉक्टर एकदम डाकू है /
दूसरी बात जिससे मै आपसे इतेफाक नहीं रखता वो यह है की ज्योतिष कोई विज्ञान नहीं है !
ज्योतिष परालौकिक गुयः विद्या है विज्ञान नहीं, इसे स्वयं भगवान सूर्य ने याग्यवाल्या को दिया और फिर अनेक ऋषियों से होता हुआ आज हम तक पहुंचा है / यह विद्या सृष्टी के फंक्शन को ब्यान करती है की वो किस प्रकार कार्य कर रही है यानी कौन सा पिंड किस तेजी से घूम कर क्या घटित कर रहा है , सुक्षम से सूक्षम वस्तु ईस्वर की रचना से ग्रहों के माध्यम से बाहर नहीं है और इस गुय्ह विद्या को विज्ञान जैसी बकवास दृष्टी से नहीं समझा जा सकता , विज्ञान भौतिक पदार्थ का अध्यन करता है वो भौतिक यान भेज कर ग्रह पिंड के दर्शन कर सकता है परन्तु ज्योतिष जिस चतुर्भुज कमलासन विराजमान एक पहिये वाले रथ पर सवार सूर्य देव को बयान करता आ रहा है उसे विज्ञान नहीं देख सकता जो सृष्टी के आधार है / गणितीय सांख्यकी तो गणना को साधे रखने के लिए ज्योतिष की बाहरी भेष भूषा है उसके बहकावे में उसे विज्ञान मान्लेने की भूल ना करे, ज्योतिष को किसी अनुसंधान की भी जरूरत नहीं है क्योकि यही एक मात्र वह विद्या है जिसे किसी अनुसन्धान की जरूरत नहीं बल्कि उस बन्दे की जरूरत है जो एस सूक्षम विद्या को ''धारण'' करने की योग्यता रखता हो यानी यह विद्या जब सूर्य देव ने याज्ञवल्य ऋषि को बतायी तब जीतनी थी अब भी उतनी ही है ना घटी है ना ही बढ़ी है और ना ही बढे गी और ना ही किसी विश्व विद्यालय में पढ़ये जाने की विद्या है क्यों की पराशर जैसे ऋषि को पहले ही समझ हो गयी थी की कलयुग में ज्योतिष के नाम पर छल होगा लिहाजा सात तालो में बंद करके गए है जनाब जो काठ के उलूऊ के हाँथ आने वाली नहीं है यह विद्या जो सुशिल दीक्षित होगा ज्योतिष उसके दरवाजे खुद चल कर जाए गी / थैंक्स/

राजीव तनेजा said...

प्रवीण जी, नमस्कार...हँसते रहो पर एक पहेली चला रहा हूँ...आपकी टिप्पणियों की वहाँ पर घोर आवश्यकता है :-)

आपकी फोटो सेव कर ली है अपनी पहेली के लिए ;-)

सैयद | Syed said...

केविन कोनोली के जज़्बे को सलाम !!

 
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