एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Saturday, November 21, 2009

लॉटरी 40 करोड़ की, मिले 7 रुपए 20 पैसे !


जयपुर की एक जानी-मानी फार्मा कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर अरविंद सैनी को इंटरनेट के जरिए जालसाजी में फंसाया गया। अरविंद सैनी को 40 करोड़ की लौटरी लगने के ई-मेल आए और फिर मिला 7 रुपए, 20 पैसे का चैक। आप अरविंद की जुबानी ही जानें, आखिर हुआ क्या था - 'मुझे ई-मेल से 10 मिलियन डॉलर (40 करोड़ रुपए) की लॉटरी अपने नाम लगने की बात कही गई। जब लॉटरी का चैक मंगवाने के लिए मैंने अपना पता संबंधित कंपनी को भेजा, तो न्यूयॉर्क से मुझे उन्होंने मात्र 18 सेंट (7 रुपए 20 पैसे) का चैक भेज दिया। साथ ही कंपनी ने मुझे शेष रकम लेने के लिए 300 डॉलर (12 हजार रुपए) देने की बात भी कही। जब उन्होंने 10 मिलियन डॉलर की लॉटरी के बदले ही 7.20 पैसे भेजे, तो मुझसे 12 हजार लेने के बाद क्या भेजते? मैंने दोस्तों से बात की, तो उन्हें भी इस तरह के प्रस्ताव मिल चुके थे, लेकिन पैसा कभी नहीं मिला था।'

ऐसे ही मामलों पर कार्रवाई में जुटे दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम चीफ एसीपी एस.डी.मिश्रा से मेरी बातचीत हुई। मिश्रा का कहना था, 'लोटो लॉटरी स्कैम, 419, एडवांस फी रैकेट और ब्लैक डॉलर्स इन दिनों चल रहे जबरदस्त घोटाले हैं। इस तरह की धोखाधड़ी वाले ई-मेल में किए गए वादे गलत होते हैं। ये ई-मेल भेजने वाले खतरनाक अपराधी होते हैं। इस धन का उपयोग गैर-कानूनी गतिविधियों में किया जा रहा है। ऐसे मामलों में तुरंत स्थानीय पुलिस को शिकायत करनी चाहिए।'

...हो सकता है ऐसे जालसाजी से भरेपूरे ई-मेल आपको आते हों, तो कभी भी अपनी निजी जानकारियां, बैंक खातों की जानकारियां, फोन नंबर इन्हें नहीं दें। मैंने इस सारे मामले की पड़ताल करने के लिए कई जालसाजों को अपनी जानकारियां अपनी रिस्क पर सौंपी, लेकिन आप ऐसा नहीं करें।

फिर मिलेंगे, किसी नई खोज के साथ...शुक्रिया

10 comments:

शरद कोकास said...

अब यह बात जगजाहिर हो चुकी है कि ऐसे मेल फर्ज़ी होते है इनके मिलते ही इनकी सूचना पुलिस को देनी चाहिये ताकि इनके खिलाफ कार्यवाही की जा सके ।

Suman said...

nice

बी एस पाबला said...

तीन साल पहले का चेक है, इसीलिए कुछ मिल गया।
आजकल तो फूटी कौड़ी नहीं मिलती

बी एस पाबला

राजीव तनेजा said...

मैँ तो ऐसी मेल्ज़ को सीधे स्पैम में डाल देता हूँ

काजल कुमार Kajal Kumar said...

मैं तो ऐसी मेल लीडरों को फारवर्ड कर देता हूं...(पर वे फिर भी उतने के उतने ही अमीर हैं...) इससे सिद्ध होता है कि उनमें भी दिमाग है.

और हां, आपके 18 सेंट भी 90 दिन के वैध चैक से 3 साल बाद आए... मुबारक..

निशाचर said...

लालच बुरी बला है भैया इसलिए हम तो इन्हें सीधे स्पैम में डालकर छुट्टी पाते हैं.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

दिन में कम से कम बीस ईमेल इस प्रकार की आती होंगी...लेकिन हम तो बिना पढे ही उसे सीधा कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं ।

S B Tamare said...

प्रिय प्रवीन जी,

नन्हे ब्लोगर को बिच में लेकर ईमेल वाले डाकूऔ के कारनामो का पर्दा फास भी खूब किया आपने !

आपके प्रयासों से यह तो जाहिर ही होगया है की यह धंधा एक विश्वव्यापी समस्या है तथा इसकी जड़ में यूरोपियन देश और कुछ एशियाई देश के बड़े श्याने उस्ताद ताक में लगे है और भारी भरकम रकम झांसे के तौर पर ईस्तेमाल में लेकर ये भोले भाले लोगो को शिकार बना रहे है / यद्धपि आपके च्चिठे पर तमाम ब्लोगरो ने यह तो स्पस्ट कर दिया की जब भी इसतरह की कोई मेल उन्हें मिलती है तो वे उसे तुरंत डिस्पोज कर देते है परन्तु मै समझता हूँ की फिर भी कुछ एक लोग फंस ही जाते होंगे जो की उन डाकूऔ की मनसा भी होती है की सब के बाद भी शिकारी को शिकार मिल जाता है / आपकी दिल्ली कमिश्नर से बात चित भी हुई मगर सार्थक नतीजा या आश्वासन मिलता नजर नहीं आया यह एक डरावनी बात है /

जन्हा तक मै समझता हूँ आपके प्रयासों का सुफल यही हुआ है की आपकी रचना से वो कुछ लोग जो शिकार हो जाते है शायद बचने में सफल रहे / थैंक्स /

पुनश्च , आपकी अगली रचना के इन्तजार में आपका ही एक फोल्लोवर !

सुलभ सतरंगी said...

प्रवीण जी, आपका ब्लॉग वाकई रोचक है. हालांकि अब इस तरह के मामले जग जाहिर हो चुके हैं. फिर भी नए उजर्स को ध्यान में रखते हुए आप आलेख सराहनीय है.

ब्लोगिंग एक सेवा है, एक मिशन है.

धन्यवाद!

अवधिया चाचा said...

बहुत अच्‍छी जानकारी, आपकी छवी के अनुरूप, हमारे अवध का प्राचीनतम इतिहास बताता है कि वहाँ कभी ऐसी घटना नहीं हुई, और आपकी पोस्‍ट पढके तो अब होगी भी नहीं,

चलते चलते आज बता दूं अलबेली लालटेन पहली बार कई दिन से बुझी हुई है और ब्लागवाणी बोर्ड पर नज़र मार लेना फिर चटका मारके एलान कर देना मेरा "अवधिया चाचा" से दूर से भी कोई सम्बन्ध नहीं है

अवधिया चाचा
जो कभी अवध ना गया

 
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