एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Wednesday, November 18, 2009

बड़े नाम पर जालसाजी !


इस सारे मामलो की छानबीन के दौरान मुझे 104 ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए फ्रॉड का खुलासा हो रहा था। इनमें से ज्यादातर दस्तावेज विश्व की बड़ी संस्थाओं के दस्तावेजों की हुबहू नकल थे। इन संस्थाओं में संयुक्त राष्ट्र संघ, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी बैंक व बैंक की सिटी ट्रस्ट सिक्योरिटीज एण्ड फाइनेंस कं.लि., एबीएन एमरो बैंक, अफ्रीकन डेवल्पमेंट बैंक, एपेक्स बैंक, डिप्लोमेटिक कोरियर सर्विस, यूरो ट्रस्ट सिक्योरिटी, फोर्टिस बैंक, राष्ट्रीय मुद्रा विनियम कार्यालय, संयुक्त राष्ट्र संघ का एंटी टैरेरिस्ट डिपार्टमेंट, ब्रिटेन की मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस एण्ड फेयर टे्रडिंग और हांगकांग की एशिया कॉमर्शियल होल्डिंग्स इंटरनेशनल लि. जैसी संस्थाएं शामिल थी। ई-मेल के जरिए इन बड़े नामों का इस्तेमाल करने वालों ने अधिकतर मामलों में वित्तीय संस्थाओं की आड़ में पूरा खेल रचा था।


(देश की खूफिया एजेंसियों, साइबर क्राइम विशेषज्ञों और पुलिस की नाक में दम करने वाले तीन घोटालों की सच्चाई कल की कड़ी ('घोटालों का राज !') में जरूर पढ़ें।)

3 comments:

Udan Tashtari said...

इन्तजार रहेगा आगे अलेख का.

Ratan Singh Shekhawat said...

इन्तजार रहेगा अगली कड़ी का

अर्शिया said...

बच के रहना रे बाबा...
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11वाँ राष्ट्रीय विज्ञान कथा सम्मेलन।
गूगल की बेवफाई की कोई तो वजह होगी?

 
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