एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Thursday, February 5, 2009

20 रुपए में मौत सत्यापित !

20 रुपए जेब में हों, तो जपयुर के अधिवक्ता नोटेरी आपको यमदूत से मिला सकते है। शहर के नोटरी किसी की भी मौत का सत्यापन महज 20 रुपए में कर देते हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण, कलेक्ट्री, मिनी सेकेटे्रट परिसर और उच्च न्यायालय परिसर में बैठे नोटेरी अधिवक्ताओं द्वारा बिना देखे, बिना संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी के फर्जी तौर पर ऐसे शपथ-पत्र जारी करने का गोरखधंधा तेजी पकड़ रहा है।

गत वर्ष 8 जनवरी को अपनी ही मौत का शपथ-पत्र मैने जयपुर विकास प्राधिकरण के एक नोटेरी से सत्यापित करवा डाला। इस मौत को सत्यापित करने वाले नोटेरी अधिवक्ता ने 20 रुपए लिए और चंद सैकंड में इस काम को अंजाम दे दिया। जयपुर विकास प्राधिकरण परिसर में सत्यापित हुए इस शपथ-पत्र में मैंने इसी दिन अपना आकस्मिक देहांत, इसी परिसर में होना बताया। दस रुपए के स्टाम्प (07एए 849806) पर मैंने अपनी मृत्यु सुनिश्चित की, जिसे सत्यापित करने वाले नोटेरी ने आवेदक का सत्यापन के दौरान वहां उपस्थित होना भी स्वीकार किया। दिलचस्प बात यह है कि अगर आवेदक की मृत्यु हो चुकी है, तो वह इसे सुनिश्चित कैसे कर सकता है? इस सवाल पर गौर फरमाने का कष्ट भी संबंधित नोटेरी पब्लिक ने नहीं किया। संवाददाता ने इस शपथ पत्र में स्वर्ग में विराजमान होकर जयपुर की रक्षा करने का जिम्मा लिया। अपनी ही मौत को शुभ कार्य बताया। ईश्वर से अपनी आत्मा को शांति प्रदान करने का निवेदन किया और अपनी मृत्यु रद्द करने के सभी अधिकार यमदूत तथा यमराज का सौंपे, जिसे नोटेरी पब्लिक ने बिना देखे, बिना पढ़े सत्यापित कर डाला। नोटेरी द्वारा रजिस्टर रखे जाने और उनके द्वारा चार्ज की गई फीस की रसीद जारी करने का प्रावधान होने के बावजूद शहरभर के नोटेरी पब्लिकों द्वारा आवेदकों को रसीद जारी नहीं की जा रही है। महज 20 रुपए और चंद सैकंड के इस खेल ने शहरभर के नोटेरी पब्लिकों द्वारा चलाए जा रहे इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया।

...और यह करतूत अब भी जारी है।

नोटेरियल कार्यों का क्या है प्रावधान
नोटेरी अधिनियम 1952 की धारा 8 के मुताबिक
* किसी लिखित के निष्पादन को सत्यापित, पुष्ट, प्रमाणित या अनुप्रमाणित करना।
* किसी व्यक्ति की शपथ प्रशासित करना या उससे शपथ-पत्र लेना।
* उत्तम प्रतिभूति की स्वीकृति या भुगतान या मांग के लिए किसी वचन-पत्र, हुंडी या विनिमय-पत्र को प्रस्तुत करना।

13 comments:

राजीव जैन Rajeev Jain said...

बधाई

राजीव जैन Rajeev Jain said...

सही कहा प्रवीण भाई
इन नो‍टेरियों को अपने 20 रुपए से मतलब होता है, भले ही उनकी खुद की मौत के सर्टिफिकेट पर साइन करा लो। मुझे तो समझ नहीं आता कि जब सभी को पता है कि ये इसी तरह जारी किए जाते है तो इस पर रोक क्‍यूं नहीं लगाई जाती।

बढिया वाक्‍या लिखा आपने बधाई

varsha said...

good job..

Suchita Maheshwari said...

good one... lage raho ..
sahi hai ab is duniya me kisi ki jaan ki keemat rah hi kha gayi hai.
unhone 20 rupye to maan lee jaan ki keemat..

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

बहुत बढिया प्रवीण जी.क्या कहूं? मृत्यु (का प्रमाण पत्र) मुबारक हो.
झूठ को सच करने का यह धन्धा अनेक जगहों पर चलता है. अस्पताल में जाकर आप किसी डॉक्टर से रुग्ण होने का प्रमाण पत्र इसी तरह प्राप्त कर सकते हैं.परिवहन विभाग के बाहर बैठे दलाल आपको ड्राइवर होने का सबूत दिलवा सकते हैं. यह क़तई ज़रूरी नहीं है कि आपको ड्राइविंग आए. बल्कि यह भी ज़रूरी नहीं कि आप भी हों. चाहें तो कभी किसी स्वर्गस्थ का ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करके देखें.

Dileepraaj Nagpal said...

very good...mujhe bhi mritu certificate lena hai. madada karenge...

haa haa haa haa haa
badhayi. badhiya

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

Nice.. Tum jeeo hazaro saal aur saal ke din ho 50 hazaar...

seema gupta said...

" strange.....maut bhi 20 Rs mey bikti hai..."

Regards

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अजी इस देश का तो भगवान ही मालिक है.....

अनिल कान्त : said...

भैया यहाँ कुछ भी हो सकता है ...देखते जाओ आगे आगे

प्रवीण जाखड़ said...

राजीव भाई, वर्षा जी, दुर्गाप्रसाद जी, शुचिता, दिलीपराज जी, आशीष भाई, सीमा जी, डी.के.शर्मा जी और अनिलकांत जी 20 रुपए की मौत पर हौसलाअफजाही के लिए ढेर सारा शुक्रिया।

आपका
प्रवीण

swati said...

bahut satik aalekh ....

neelima sukhija arora said...

badhai, u r 1 of the best investigative reporters

 
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