एक ऐसा शक्स जो कभी हार नहीं मानता। आखरी कोशिश के बाद भी एक चांस लेना पसंद करता है। पत्रकार बना क्योंकि समय की नजाकत थी। अच्छा लिख लेता हूँ, क्योंकि शौक को अपना प्रोफेशन बनाया। खुद पर यकीं है और मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा काम है, जिसे मैं नहीं कर सकता। अपने फैसलों पर टिके रहना मेरी आदत है।

Thursday, June 25, 2009

ब्लॉगर्स शुक्रिया!




9/11 के आतंकवादी हमले की ब्लॉग पर प्रकाशित छह कडिय़ों को लेकर दुनियाभर के ब्लॉगर्स का रेस्पॉन्स मिला। अविश्वसनीय रेस्पॉन्स! उन छह दिनों में 950 से ज्यादा लोगों ने ब्लॉग पर हिट किया और कडिय़ों को पढ़ा। न केवल देशभर से मुझे फोन के जरिए जाने कितने ही ब्लॉगर्स ने संपर्क किया, बल्कि उन्हें पड़ताल का तरीका भी पसंद आया। इसी दौरान मुझे अमरीका और दुबई जैसे देशों से भी फोन आए, ई-मेल आए। मैं नहीं जानता लोगों ने मेरा मोबाइल नंबर कहां से जुटाया। शायद कुछ ब्लॉगर्स को परेशानी भी हुई, जिसके लिए मैं उनसे माफी चाहंूगा।

कुछ ब्लॉगर्स ने सरकारी घोटालों, तो कुछ ने अंतरराष्ट्रीय घोटालों के दस्तावेज गोपनीय रूप से मेल भी किए। कुछेक मित्रों ने अपने निजी मामलों में खोजबीन करने का प्रस्ताव रखा। आप सभी मेरे लिए सम्माननीय हैं, सिर्फ इतना ही निवेदन करूंगा कि जब मौका मिला, समय निकाल पाया सही काम की पड़ताल करने के लिए हमेशा तैयार हंू। आप आधी रात को भी बेझिझक गोपनीय मामलों के संबंध में संपर्क कर सकते हैं।

आप सभी ब्लॉगर्स और भविष्य में जुडऩे वाले ब्लॉगर्स को परेशानी ना हो इसलिए अभी-अभी मैंने अपने ब्लॉग पर गैजेट में मोबाइल नंबर चस्पा कर दिया है। ...खास आपके लिए। ताकि आप परेशान ना हों।

शुक्रिया।

Tuesday, June 16, 2009

मिल मजदूर बना चीन का सबसे धनी व्यापारी


जज्बा और हौसला फर्श से अर्श पर पहुंचा देने की कुव्वत रखता है। मिसाल हैं चीन के ल्यू यॉन्गजिंग, जिन्होंने मिल मजदूर से देश के सबसे धनी शख्स बनने का सफर तय किया। कामयाबी की कहानी खुद उन्हीं की जुबानी-


भले ही मैं आज चीन का सबसे धनी व्यापारी हूँ, लेकिन यह कभी नहीं भूलता कि तीस बरस पहले एक मिल में मजदूर भी था। आज चीन में मेरी 100 फीडस्टफ प्रोसेसिंग फैक्ट्रियां हैं। इनमें पशुओं के लिए चारा, आटा और दूसरे खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। आज हम चीन में ऐसे प्राइवेट एंटरप्रेन्योर के रूप में स्थापित हो चुके हैं, जो पूरी तरह विज्ञान और तकनीक का उपयोग अपने कारोबार में कर रहे हैं। ऐसे कारोबार में जिससे चीन के लाखों किसान जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि चीन के किसानों के लिए होप कंपनी धनी बनने का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभर रही है। हम डब्ल्यूटीओ में शामिल हो चुके हैं और आप जल्द ही हमें न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में भी पाएंगे।


दक्षिण-पश्चिम चीन के साईशुएन के एक बेहद गरीब परिवार में मेरा जन्म हुआ। बाकी सुविधाओं की बात तो दूर दो वक्त की रोटी जुटाना भी हमारे लिए चुनौतीपूर्ण था। परिस्थितियां बिलकुल भी अनुकूल नहीं थी। ...और मैं पचास डॉलर प्रति सप्ताह मजदूरी मिलने वाले देश में मजदूर के तौर पर संघर्ष कर रहा था। मैं और मेरे तीन भाई वर्षों तक मजदूरी करते रहे और परिवार चलाते रहे। मेरी जड़ें गांव से जुड़ी थीं, इसलिए मैं ऐसे ही किसी कारोबार को शुरू करने की योजना बनाता, जो सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा हो। अपने हालात और माहौल के मुताबिक मैंने तीतर और चूजों का कारोबार करने की जब ठानी, तो जेब में एक पैसा नहीं था। तीतर खरीदने के लिए मैंने अपनी घड़ी और साइकिल भी बेच दी। इनसे मिले पैसों से अपने तीनों भाइयों के साथ कारोबार शुरू करने का फैसला किया। इस कारोबार की शुरुआत हमने 1982 में की। हम तीतर और चूजे लाते, उन्हें पालते और बेच देते थे। हालांकि शुरू-शुरू में तो तीतर और चूजों के कारोबार में हमेंं ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ। हम चूजों के भोजन और दवाओं का बंदोबस्त भी कई बार मुश्किल से ही कर पाते थे। लेकिन जैसे-जैसे कारोबार का विस्तार चीन के किसानों तक हुआ, हम आगे बढ़ते गए। 1995 आते-आते कंपनी 300 मिलियन युआन (चीनी मुद्रा) की बन गई। यह कारोबार ज्यादा लंबा नहीं चला। इसी दौरान मेरे भाई मुझसे अलग हो गए, लेकिन मैं बिना रुके आगे बढ़ता चला गया। इसी साल मैंने होप ओरियंटल कॉर्पोरेशन की स्थापना की।

वर्ष 2001 में मुझे फोर्ब्स की ओर से अपने आठ बिलियन डॉलर के कारोबार के चलते टॉप एंटरप्रेन्योर का दर्जा दिया गया। 2005 में चीन के 400 धन कुबेरों की सूची में मैं पांचवें स्थान पर आ गया। इसी साल सोहू कोमस की ओर से 'टॉप 10 फाइनेंशियल पीपल ऑफ 2001Ó में शामिल किया गया। एशिया वीक मैगजीन की ओर से 'मोस्ट इंफ्लुएंटल एंटरप्रेंयोर्स इन चाइना इन द ट्वंटी फर्स्ट सेंचुरी'का सम्मान मुझे दिया गया और फोर्ब्स मैगजीन की ओर से 2008 के सबसे धनी चीनी व्यापारी के तौर पर नवाजा गया। जो भी हुआ वह कोई चमत्कार नहीं था, बल्कि हमारी जी तोड़ मेहनत और संभावनाओं के परिणामस्वरुप ऐसा हुआ। इस कारोबार में संभावनाएं तो थीं ही लेकिन इस कामयाबी के पीछे मेरा जबरदस्त संघर्ष और उच्च महत्त्वाकांक्षा थी।

(14 जून, 2009 को रविवारीय के मेरा संघर्ष कॉलम में प्रकाशित)

 
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